शहर और कैंट… बरेली की इन दो विधानसभाओं में कटे सबसे ज्यादा वोटर, क्या है दोनों सीटों का गणित

SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद बरेली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. दरअसल, जिले में कुल वोट कटौती का 40 प्रतिशत अकेले उसकी दो शहरी सीटों पर दर्ज किया गया. आंकड़ों के मुताबिक बरेली शहर और कैंट विधानसभा क्षेत्र से करीब 3 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं.

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यूपी में SIR के तहत जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने बरेली की राजनीति में हलचल मचा दी है. जिले में कुल 21 फीसदी यानी 7 लाख 16 हजार 509 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. लेकिन सबसे ज्यादा दो सीटों बरेली शहर और बरेली कैंट विधानसभा पर पड़ा है. इन दोनों सीटों पर अकेले करीब 3 लाख वोट कट गए हैं. इसको लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

भाजपा इसे वोटर लिस्ट की सफाई बता रही है. वहीं, विपक्ष इसे सीधे तौर पर वोट काटने की साजिश करार दे रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शहर और कैंट में ही सबसे ज्यादा वोट क्यों कटे. इसका चुनावी गणित पर क्या असर पड़ेगा.

बरेली शहर सीट पर सबसे ज्यादा वोट कटे

आंकड़ों के मुताबिक जिले में सबसे बरेली शहर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा वोट कटे हैं. यहां कुल 1 लाख 65 हजार 685 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं. इसके बाद बरेली कैंट विधानसभा का नंबर आता है. यहां भी 1 लाख 34 हजार 933 वोट कटे हैं. इसका साफ अर्थ ये हुआ कि जिले में कुल वोटों की कटौती में 42 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इन्हीं दो सीटों का है. यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है.

वोट कटने पर प्रशासन का पक्ष

बरेली शहर में वर्तमान में कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 3 हजार 507 हैं. वहीं, कैंट में यह संख्या 2 लाख 48 हजार 558 है. दोनों सीटें शहरी हैं. इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों में अधिकतर का नौकरी, पढ़ाई और ट्रांसफर की वजह से लोगों का आना-जाना ज्यादा रहता है. प्रशासन का तर्क है कि इसी कारण यहां शिफ्टेड, अब्सेंट, और डेड कैटेगरी में ज्यादा नाम आए हैं.

जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम अविनाश सिंह के मुताबिक, SIR पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है. जिन 7.16 लाख नामों को ASD श्रेणी में रखा गया है, उनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो या तो मर चुके हैं, शहर छोड़ चुके हैं. इसमें से कई ऐसे हैं जो लंबे समय से अपने पते पर नहीं मिल रहे.

इन लोगों के नाम काटे गए हैं

आंकड़ों के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं उनमें से 1,15,166 मृतक हैं. 2,92,018 वोटर शिफ्ट हो चुके हैं. 2,37,139 लोग ऐसे हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया. साथ ही 59,679 नाम डुप्लीकेट पाए गए. प्रशासन का कहना है कि शहरी इलाकों में वोट कटने की समस्या ज्यादा है. कई लोग किराए पर रहते हैं, नौकरी के चलते दूसरे शहर चले जाते हैं और वोट कटने की जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती.

विधायक संजीव अग्रवाल ने सपा पर साधा निशाना

बरेली कैंट से भाजपा विधायक संजीव अग्रवाल ने कहा कि शहरों में वोट कटना स्वाभाविक है. कई ऐसे मतदाताओं के वोट अब हटाए गए हैं, जो 15–20 साल पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं. इसके अलावा नौकरी और ट्रांसफर की वजह से बाहर गए लोगों के वोट भी अब सूची से हटे हैं.

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह हर बार EVM और वोटर लिस्ट पर सवाल उठाती है. उनका कहना है कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और जिनके वोट किसी कारण से कटे हैं, वे फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं.

अब जानिए चुनावी गणित शहर और कैंट क्यों अहम हैं

बरेली शहर और कैंट विधानसभा सीटें हमेशा से चुनावी तौर पर अहम रही हैं. यहां शहरी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने से विपक्ष को मुद्दा मिल गया है, जबकि भाजपा इसे अपने लिए नुकसान नहीं मान रही है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आपत्ति की अवधि के दौरान कितने लोग अपना नाम मतदाता सूची से जुड़वाते हैं. अंतिम सूची 6 मार्च को जारी होगी. इसके बाद ही साफ होगा कि शहर और कैंट में वोटर कटौती का असली असर क्या होगा.